कुछ ऐसी होती है किन्नरों की शव यात्रा, जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे

किन्नरों को तो हम सब ने देखा है। किन्नरों को देख कर जैसे कुछ अलग महसूस करते हैं आप। उन्हें देखकर ही पता लग जाता है कि ये हमारे आम समाज का हिस्सा नहीं हैं। और ये सही भी है। किन्नर भले ही कहीं पर भी आपको देखने को मिल जाएं, लेकिन इनके रहन- सहन, वेष- भूषा सब कुछ हम लोगों से अलग होता है। आपने कभी भी किन्नरों के अपने कॉलोनी या मुहल्ले में रहते नहीं देखा होगा। इनका खुद का अपना एक मोहल्ला होता है, जहां ये अपने तरीके से जीते हैं। इनके कई रीति- रिवाज भी हम सब से बिल्कुल अलग हैं।

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क्या आपने कभी किसी किन्नर की शव यात्रा देखी है तो शायद आपका जवाब होगा नहीं। क्योंकि किन्नरों के शव यात्रा से जुड़े रिवाज भी होते हैं हम सब से बिल्कुल अलग। किन्नरों की शव यात्रा रात में निकलती है। क्योंकि इनका मानना है कि इनकी शव यात्रा को कोई और ना देखें। यहां तक की इनके समुदाय के अलावे किसी दुसरे समुदाय के किन्नर भी इनकी शव यात्रा में शामिल नहीं हो सकते हैं। किन्नरों की शव यात्रा सबसे छुपा कर निकाली जाती है।

kinnar photo

आपको सुनकर अजीब लगेगा लेकिन किन्नरों के शव का अंतिम संस्कार करने से पहले उसे जूते- चप्पलों से पीटा जाता है। ऐसा करने के पीछे का कारण ये है कि माना जाता है कि इससे उसके इस जन्म के पापों का प्रायश्चित हो जाता है। हालांकि किन्नर हिन्दू धर्म का पालन करते हैं, लेकिन ये लोग शव को जलाते नहीं हैं, बल्कि उन्हें दफनाते हैं।

किन्नर के मौत पर कभी भी मातम नहीं मनाया जाता है। किसी के मरने पर किन्नर चाहे कितने भी दुखी हो, लेकिन वे लोग रोते नहीं है। ऐसा इनका रिवाज है, क्योंकि ये मानते हैं कि मरने से उसे इस नर्क वाले जीवन से छुटकारा मिल गया। किन्नरों के अराध्य देव अरावन हैं। भगवान अरावन से ये किन्नर साल में एक बार शादी करते हैं। यह शादी सिर्फ एक दिन के लिए होती है। ऐसी मान्यता है कि अगले दिन उनके अराध्य देव की मौत हो जाती है जिसके कारण उनका वैवाहिक जीवन उसी दिन खत्म हो जाता है।

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